Sunday, April 26, 2015

What is knee sprain in hindi

घुटने में मोच क्या है ?

• तन्तुओं के फटने या खिचाव के कारण आती है मोच। 
• लिगामेंट में लगने वाली चोट पैदा करती है दर्द और सूजन। 
• घुटने में हो सकता है फैक्चर भी। जांच कराना है जरूरी। 
• घरेलू उपचार जैसे सिकाई आदि से भी हो सकती है मोच ठीक।

मानव अंगों के तन्तुओं के फटने या उनमें खिचाव आने को मोच आना कहते हैं। ऐसा शरीर के किसी अंग को जरूरत से ज्यादा जोर देकर काम करने की वजह से हो सकता है। कई बार ऊंचाई से कूदते में या खेलते समय भी घुटनों में मोच आ सकती है। 

मानव शरीर में पैर जितने महत्त्वपूर्ण हैं, उतने ही उनकी आत्मा का काम करने वाले घुटने महत्वपूर्ण होते हैं। उन्हीं से पैरों को मुड़ने की क्षमता मिलती है। कहते हैं कि अगर घुटने मजबूत और रोग मुक्त रहें तो बुढ़ापा भी परेशान नहीं करता। लेकिन इन्हिं घुटनों में कई कारणों से दर्द हो जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। इस कारणों में सबसे बढ़ा कारण होता है घुटने में आई मोच। आइये जानते हैं कि घुटनों में मोच कैसे आ सकती है, और मोच आ जाने पर क्या किया जाए।

क्यों आती है घुटनों में मोच

अक्सर कहीं से कूदने या दौड़ते हुए गिरने पर घुटने में मोच आ जाती है। इसका मतलब कभी कार्य करने में कुछ असावधानी या अनियमितता, या कभी कभी दुर्भाग्य से मोच आ जाती है। घुटने में मोच आ जाने से असहनीय पीड़ा होती है और मोचग्रस्त भाग को जरा सा भी हिलान-डुलाने पर वह बुरी तरह से दुखने लगता है। साछ ही उसमें सूजन भी आ जाती है।घुटनों में मोच लिगामेंट में लगने वाली चोट के कारण आती है। इस प्रकार से मोच फाइबरस टिश्यू में किसी प्रकार के खिचाव या चोट के कारण आती है। दरअसल फाइबरस टिश्यू के मजबूत बैंड्स को ऊपरी और निचले पैर के घुटने को जोड़ने का काम करते हैं। घुटनों के जोड़ में मुख्यत: चार लिगामेंट होते हैं।
1- एन्टीहरियर क्रूाशियेट लिगामेंट (एसीएल)2- पास्टीरियर क्रूथशीयेट लिगामेंट (पीसीएल)3- मेडिकल कालेटरल लिगामेंट (एमसीएल)4- लेटरल कालेटरल लिगामेंट (एलसीएल)
जब इनमें से कोई भी लिगामेंट क्षतिग्रस्त होता है तो सूजन पैदा हो जाती है और दर्द होने लगता है। इसे साधारण भाषा में मोच कहा जाता है।

मोच आने पर क्या करें ?

घुटने में मोच आने पर मोचग्रस्त अंग को स्थिर अवस्था में रखें और जितना हो सके आराम दें। अब घुटने पर पानी से गीला कर एक पट्टी बांध दें। घरेलू नुस्खे के तौर पर इमली की पत्तियां उबाल लें और इसमें थोड़ा नमक भी डाल दें। अब इस उबले पानी से मोचग्रस्त अंग धोएं। फिर पत्तियां लगाकर साफ कपड़े की पट्टी बांध दें। कुछ दिन तक इसे करें जब तक मोच ठीक न हो जाए। ऐसा करने से आराम जरूर मिलेगा।

यह तो रहा घरेलू नुस्खा लेकिन सबसे अच्छा तरीका है कि मोच आने पर घुटने पर पट्टी बांध लें और फिर किसी हड्डी के डॉक्टर से घुटने की जांच व जरूरत पड़ने पर एक्स रे कराएं। कई बार घुटने में फैक्चर भी हो सकता है। इस लिए मोच समझ कर उसे नजरअंदाज न कर दें।

टखने में मोच के खतरे को कम करने के लिए आप ये उपाय आजमा सकते हैं

जिस स्थान पर आप पैदल चल, दौड़ अथवा कूद रहे हैं, उस धरातल को अच्छी तरह देख लें। और उसी के अनुसार अपना संतुलन बनाकर व्यवहार करें।

किसी भी एथलीट एक्टिविटी से पहले स्ट्रेचिंग व्यायाम जरूर करें। 

संतुलन बनाये रखने के लिए जरूरी व्यायाम आपकी मदद कर सकते हैं।

अच्छी क्वालिटी के जूते पहनें जो आपके खेल और पैरों के लिहाज से अनुकूल हों।

अचानक तेज गति से न मुड़ें 

दौड़, साइक्लिंग और स्वमिंग आदि से पैरों और टांगों को मजबूती प्रदान करने वाले व्यायाम करें।
अगर आपको टखने में कई बार मोच आ चुकी है, तो आपको स्ट्रेंथनिंग और बैलेंस एक्सरसाइज करनी होंगी।


आपको बटखने को चोट से बचाने तथा उसे जल्द रिकवर करने के लिए ब्रेस बांधने की जरूरत होती है। 

Monday, March 2, 2015

How to completely eliminate sugar from your life in two months in hindi

सिर्फ 2 महीने में शुगर को कैसे करें अपनी जिंदगी से दूर

1. शुगर पर नियं‍त्रण


कभी आपने सोचा है कि क्‍यों आप वजन कम करने या एक स्‍वस्‍थ डाइट को लागू करने के कार्यक्रम को अपनाने में असमर्थ रहते हैं। और ऐसा करना आपको बिना बताये शुगर की लत की ओर घसीट रहा है। लेकिन आपकी इस समस्‍या के समाधान के लिए इस स्‍लाइड शो में कुछ ऐसे टिप्‍स दिये गये हैं जो मिठाई के प्रति आपकी लालसा में कटौती कर आपको स्‍वस्‍थ खाद्य पदार्थों की तरफ ले जायेगें। इस तरह से खाना न केवल शुगर पर अंकुश लगाने में मदद करेगा बल्कि इससे आप बेहतर, हल्‍का और अधिक सक्रिय भी महसूस करेंगे। इसके अलावा यह वजन घटाने के लक्ष्‍य को पाने में भी आपकी मदद करेगा।






2 मीठे पेय पदार्थ से क्‍यों तौबा करें (समय: 1 से 2 सप्ताह)


हमें सबसे ज्‍यादा मात्रा में शुगर पेय पदार्थों से मिलता है, इसलिए सॉफ्ट ड्रिक्‍स, मीठा पानी, कॉफी ड्रिक्‍स, एनर्जी ड्रिक्‍स, फ्रूट ड्रिंक्‍स यह सब हमारे लिए एक अपराधी की तरह है। वास्‍तव में एप्‍पल जूस, एप्‍पल फ्लेवर, 100 प्रतिशत स्‍वीटनर और केंद्रित फ्रुक्टोज के संयोजन से बनता है। इसलिए इसे 100 प्रतिशत एप्‍पल का जूस कहते है। इसके अलावा पेय पदार्थों के आकार के कारण बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी और शुगर चुपके से आपके आहार में शामिल हो जाती है। एक पेय पदार्थ में लगभग 150 कैलोरी होती है। इसके अलावा मूवी हॉल और फास्‍ट फूड में मिलने वाले पेय पदार्थों में तो 300 से 500 के आसपास कैलोरी होती है।


3. मीठे पेय पदार्थ से दूर रहने के उपाय


मीठे पेय पदार्थों की लत होने पर इनसे दूर रहना कठिन हो सकता है। और साथ ही इसे छोड़ना आपके लिए एक चुनौती से कम नहीं होगा। इसलिए भी क्‍योंकि यह आपके नए तरीके के आहार का हिस्‍सा नहीं है। इसलिए इसे एक साथ छोड़ने की बजाय धीरे-धीरे इसकी मात्रा को कम कीजिए। ऐसे पेय पदार्थों की सूची बनायें जिसमें शुगर की अधिक मात्रा होती है और और उनसे बचने की कोशिश करें।

4. जंक फूड से क्‍यों बचें (2-3 सप्‍ताह)


क्‍या आपको फास्‍ट फूड इतना पसंद है कि किसी भी रेस्‍तरां में जाने पर आप इसी को खोजते हैं। तो यह आदत सही नहीं है। क्‍योंकि ऐसे आहार में शुगर और नमक की अधिक मात्रा होने के साथ ही कार्बोहाइड्रेट भी तेल के रूप में मौजूद होता है जो  शरीर में शुगर के स्‍तर को बढ़ा देता है। और हमारे के लिए बहुत नुकसानदेह होता हैं। केक, कुकीज, कैंडी, आइसक्रीम, चिप्‍स, पॉपकॉर्न आदि भी इसी श्रेणी में आते हैं।

5. जंक फूड से बचने के उपाय

शुगरयुक्‍त पेय पदार्थ की तरह जंक फूड से बचना भी आपके लिये थोड़ा मुश्किल हो सकता है। क्‍योंकि अक्‍सर बाहर खाने की वजह से आप इससे बच नहीं पाते। लेकिन धीरे-धीरे आप इसे भी अपने डायट चार्ट से निकाल सकते हैं। इसके लिए अपने जंक फूड सूची बनाकर देखें कि कौन से फूड में शुगर और अन्‍य कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सबसे अधिक है। और प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले उसी से दूर रहें। इसकी जगह ताजे फल खाने की आदत डालें, इससे आपको पोषण भी मिलेगा और शुगर से भी बचाव होगा।

6. कार्बोहाइड्रेट को क्‍यों कम करें (3-4 सप्‍ताह)


इस स्‍तर पर पहुंचने पर अपने आपको बधाई दें। हालांकि आपने इस स्‍तर पर जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ से कुछ हद तक कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम कर दी है, लेकिन अब भी इसमें कटौती करना जरूरी है। क्‍योंकि ब्रेड, पास्ता और चावल जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट, से निपटने की जरूरत है। दोनों सरल और जटिल कार्बोहाइड्रेट ब्‍लड शुगर को प्रभावित करते हैं। जिससे आपका वजन कम नहीं होता है। इसके अलावा इसके अधिक सेवन से आपको खाने को लेकर लालसा फिर से बढ़ सकती है।

7. कार्बोहाइड्रेट कम करने के उपाय


हालांकि आपको ब्रेकफास्‍ट में ब्रेड, पास्‍ता आदि खाने की आदत होती है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा होने के कारण यह शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ाता है। इसलिए नाश्‍ते में इनका विकल्‍प तालाशिये, ब्रेड, पास्‍ता, आदि की जगह सलाद, ताजे फल, अंडे खा सकते हैं, इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। लंच और डिनर में भी इसका ध्‍यान रखें। इसके अलावा इसको छोड़ने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि ऐसे कार्बोहाइड्रेट की सूची बनाए जिन्‍हें आप जरूरत से ज्‍यादा खाते हो और फिर उन्हें एक एक करके अपने आहार से दूर करें।

8. छिपे हुए शुगर से कैसे बचें (1 से 2 सप्‍ताह)


खाने को अधिक स्‍वादिष्‍ट बनाने के चक्‍कर में आप सॉस, ड्रेसिंग, केचअप और मसालों आदि को अपने आहार में मिलाते हैं। लेकिन यह सब आपके वजन घटाने के लक्ष्य के खिलाफ काम करता हैं। क्‍योंकि कुछ मसालों की एक छोटी सी राशि भी अपने आहार में मिलाकर आप शुगर की मात्रा को ग्रहण करते हैं। डिब्‍बाबंद आहार जिसमें लो फैट लिखा होता है, वह भी शुगरयुक्‍त होते है। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले 'शुगर फ्री' उत्‍पादों का उपयोग भी सावधानी से करना चाहिए। क्‍योंकि वास्‍तव में यह उत्‍पाद चीनी मुक्त हो सकते हैं लेकिन यह तेजी से मेटाबोलीज़िंग कार्बोंहाइड्रेट को शामिल करते हैं।

9. छिपे हुए शुगर से बचने के उपाय


इस चरण में पिछले चरण की तुलना में छिपे हुए शुगर से बचना अधिक आसान होगा क्‍योकि आप एक चरण से दूसरे चरण की प्रगति की ओर है। और आप स्‍वस्‍थ खाने की आदतों को अपना चुके हैं। यहां पर आपका लक्ष्‍य खाद्य पदार्थों पर पोषण लेबल की पहचान कर छिपे हुए शुगर जानना और उसकी जगह दूसरे खाद्य पदार्थों को अपनाना है।

10. भोजन के नए रास्ते बनाए रखें (बाकी के जीवन)


यह खाने का तरीका है न कि अस्‍‍थायी आहार योजना। इसका मतलब एक बार अपने आहार से शुगर, कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ को दूर करने के बाद आपको आगे के जीवन में इस तरह से खाने के तरीके को शमिल करना है। लेकिन इसको अस्थायी शामिल करने और पुराने तरीके पर जाने पर आप फिर से बहुत जल्‍द ही लत की इच्‍छाशक्ति की रस्‍सी में फंस जाएगें। ऊपर वर्णित चार चरणों को अपने जीवन में अपनाकर आप स्‍वस्‍थ भोजन शैली को हमेशा बनाये रख सकते हैं।

11. निय‍म का पालन कैसे करें



याद रखें, प्रत्येक चरण में समय लगता है। इसलिए आवंटित समय को एक न्यूनतम दिशा निर्देशों के रूप में पालन करें। धैर्य से काम लें। खुद पर संयम रखें और इस दिनचर्या का पालन करें। अगर आपको लगता है कि एक चरण आप की उम्‍मीद से ज्‍यादा समय ले रहा है तो परेशान न हो। क्‍योंकि आपका महत्वपूर्ण उद्देश्‍य लक्ष्य को प्राप्त करना है। ऐसा करने से आपके अंदर होने वाले बदलाव आपको दिख जायेंगे। खानपान की यह प्रक्रिया आपको ऊर्जावान तो रखेगी साथ ही मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी से बचायेगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा।

Eight memory skills that will make you way smarter in hindi


आठ आसान उपाय जो आपकी याद्दाश्‍त बढ़ायें

1. ऐसे बढ़ायें अपनी याद्दाश्‍त
सीखना तो उम्र भर चलता रहता है। लगातार सीखते रहने और उसका लाभ उठाने की यह प्रवृत्ति ही तो इनसान को बाकी जीवों से अलग करती है। इनसान की बुद्धि और विवेक ही उसे बाकियों से बेहतर बनाती है। इसलिए अपने हुनर को लगातार मांझते रहना बहुत जरूरी है। यहां हम कुछ ऐसे प्‍वाइंट्स बता रहे हैं, जो आपको अपनी याद्दाश्‍त को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।




2. चीजों को जोड़ना सीखिये
आप जो चीजें, बातें नयी सीख रहे हैं, उन्‍हें पुरानी बातों से जोड़ना सीखें। उदाहरण के लिए यदि आपको यमुना की लंबाई (1376 किलोमीटर) के बारे मे पता चला है, तो आप उसे ताजमहल से जोड़ सकते हैं। इससे आपको दोनों के बारे में जरूरी चीजें याद रहेंगी।


3. दोहरायें
जब आप किसी चीज को मन ही मन दोहराते हैं, तो आपके लिए उसे याद रखना आसान हो जाता है। या तो आप चीज को अपने मन में दोहराते रहें। आप चाहें तो उन बातों को लगातार कागज पर लिखकर भी याद कर सकते हैं। इससे आपको उन शब्‍दों को याद रखने में आसानी होगी।

4. तरीके आजमायें
यदि आप‍ किसी घटनाक्रम को याद करने का प्रयास कर रहे हैं, तो कुछ तरकीब भी आजमा सकते हैं। मान लीजिये आपको अंग्रेजी में नवग्रहों के नाम याद करने हैं, तो आप `My Very Educated Mother Just Showed Us Nine Planets’, का तरीका आजमा सकते हैं। इसमें हर शब्‍द के पहले अक्षर से ग्रह का आता है।

5. कार्ड पर लिख लें
जब आप महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक तारीख, फॉर्म्‍यूले आदि को याद करना हो, तो आप इसके लिए फ्लैश कार्ड पर उन्‍हें लिख सकते हैं। और जब भी आपको जरूरत महसूस हो, आप उन कार्डस को देख सकते हैं।


6. गाएं और याद्दाश्‍त बढ़ायें
अपनी लयबद्धता के कारण संगीत आसानी से आपके दिमाग में समा जाता है। अपने पसंदीदा गाने की धुन पर उन चीजों को सेट कर लीजिये, जिन्‍हें आप याद करना चाहते हैं। इससे आप तथ्‍यों को लंबे समय तक याद रख पाएंगे।


7. जो पढ़े उसे महसूस करें
आप जो भी पढ़ें मस्तिष्‍क में उसकी एक तस्‍वीर बनाने की कोशिश कीजिये। इससे आप चीजों को अधिक लंबे समय तक याद रख पाएंगे। जब आप पढ़ रहे हों, तो साथ-साथ उन शब्‍दों के बारे में सोचना शुरू कर दें। सोचें कि वह चीज कैसी दिखती होगी, उसकी सुगंध कैसी होगी अथवा उसका स्‍वाद कैसा हो सगता है\

8. उदाहरण दें
जब आप किसी चीज को असल जिंदगी के उदाहरणों से जोड़कर देखते हैं, तो मस्तिष्‍क के लिए उन चीजों को दोहराना आसान हो जाता है। हमारा मस्तिष्‍क उन तथ्‍यों को आसानी से याद रख पाता है। कहा जाता है कि मानव जीवन भर अपने मस्तिष्‍क का बामुश्‍किल पांच से सात फीसदी ही इस्‍तेमाल कर पाता है। बाकी हिस्‍सा अनछुआ ही रह जाता है। लेकिन, अपनी याद्दाश्‍त को सुधारने के लिए आपको मस्तिष्‍क का व्‍यायाम जरूर करना चाहिये।


Tuesday, November 18, 2014

Bitten by a dog in hindi here is what you need to do

क्या करें जब कोई कुत्ता काट ले

  • जख्म को अच्छी तरह नल के नीचे रखकर धोयें। 
  • अच्छे एंटीबैक्टीरियल से जख्म को साफ करें। 
  • डॉक्टर को दिखायें और रेबीज का इंजेक्शन लगवायें। 
  • अपने पालतू कुत्ते को भी जरूरत इंजेक्शन लगवाकर रखें।
कुत्ता आपको कई कारणों से काट सकता है। घर पर आपके साथ खेलता प्यारा पपी हो या फिर गली में घूमता अनजान कुत्ता। जब आपको कुत्ता काटे तो आपको कई चरणों में इसका इलाज करना पड़ता है। लेकिन यह सब जख्म की गंभीरता और हालात पर भी निर्भर करता है। तो अगर आपको कुत्ता काटे तो आपको किन बातों का खयाल रखना चाहिये, यह हम आपको बताते हैं।




सतही घाव

अगर आपका घाव या खरोंच सतही है, तो सबसे पहले उसे नल के बहते पानी के नीचे रख दें। और फिर इसे हाइड्रोजन पेराऑक्टसाइड या आईसोप्रापिल अल्कोहल युक्त कीटाणुनाशक से साफ करें। इसके ऊपर एंटीबॉयोटिक लगायें और जख्म को बैडेज से कवर कर दें। डॉक्टर को जरूर दिखायें और देखें कि कहीं आपको इंजेक्शन की जरूरत तो नहीं।

गहरा जख्म

सबसे पहले इस जख्म से खून बहने पर उसे रोकें नहीं। हां, अगर बहुत तेजी से बहुत ज्यादा खून बह रहा हो, तो आपको इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इसके साथ ही अगर यह जख्म आपकी गर्दन या सिर पर हो तो भी आपको फौरन चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिये। अन्य स्थानों पर लगे जख्म से बहने वाला सीमित रक्त वास्तव में इसे साफ करने का ही काम करता है। पांच मिनट बाद जख्म को दबाकर देखें कि क्या खून का बहना रुक रहा है अथवा नहीं। अगर ऐसा न हो, तो फौरन आपातकालीन चिकित्सीय सहायता प्राप्त करने का प्रयास करें। अगर खून रुक जाए तो जख्म को नल के बहते पानी के नीच रखकर उसे पांच साफ करें। आप माइल्ड सोप से अपने जख्म को साफ भी करें। पंक्चर अथवा गहरे जख्म पर अल्कोहल, हायड्रोजन पेरोक्साइड, आयोडीन अथवा मर्क्यूोक्रोम का इस्तेमाल न करें। इससे जख्म के ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। पंक्चर जख्मों में बैंडेज लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन, अगर आप ऐसा करते भी हैं, तो इस बात का खयाल रखें कि आपका जख्म पूरी तरह साफ हो। कुत्ते के काटने से आमतौर पर कोई चीज अंदर नहीं रह जाती, जिसे बाद में साफ करने की जरूरत महसूस होती हो। अपने कुत्ते को रेबीज वैक्सीन जरूर लगवायें। डॉक्टर से अपनी जांच करवायें और जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन लगवायें।

रेबीज



अगर आपको कोई आवारा कुत्ता काटता है, तो इस बाबत आप नगर निगम को सूचित करें। वह इस कुत्ते को पकड़कर ले जाएंगे। इसके साथ ही आपको फौरन रेबीज का टीका भी लगवाना चाहिये। अगर आपको काटने वाला कुत्ता पागल या पैरालाइज हो या फिर उसका व्यवहार अजीब हो तो भी फौरन आप चिकित्सक से संपर्क कीजिये। हां किसी भी प्रकार की परिस्थिति में अपने जख्मों को साफ करना न भूलें।

अगर आपका पालतू कुत्ता आपको काटे तो क्या करें



आपका पालतू कुत्ता भी आपको काट सकता है। खासतौर पर जब उसके दांत निकल रहे होते हैं तब वह चीजों को चबाने और काटने की कोशिश करता है। इस बात का खयाल जरूर रखें कि कुत्ता आपको गुस्से में न काट खाये। कभी-कभार छोटे कुत्ते की त्वचा का कुछ हिस्सा फट जाता है, तो इसमें कुछ घबराने वाली बात नहीं है असल में यह उसके विकास का एक हिस्सा है। इससे निपटने के लिए दो बातों का खयाल रखें। सबसे पहली बात, शांत रहें। छोटे कुत्ते के काटने से आपको दर्द तो होगा, लेकिन आपको अपना संयम बनाकर रखना है। दूसरी बात आपको इन संकेतों को समझना होगा कि आपका कुत्ता काटने वाला है। और इससे पहले कि वह ऐसा करे आपको उसकर गलती सुधारनी होगी। इससे उसे ऐसा न करने की समझ आएगी और धीरे-धीरे उसकी यह आदत छूट जाएगी। अगर आपके कुत्ते ने आपको हल्का सा काट लिया है तो उसे जख्म को अच्छे से साफ कर एक बार डॉक्टर से संपर्क करें। इसके साथ ही अपने पालतू कुत्ते को भी सभी जरूर इंजेक्शन जरूर लगवाते रहें।

What causes acne in men how get rid in hindi

तुलसी व पुदीने के पत्तियों जैसे कई घरेलु उपाय दिला सकते हैं पुरुषों को मुहासों से निजात

ऑयली त्वचा होती है पुरुषों में मुहांसों की समस्या की बड़ी वजह
  • ऑयली और बड़े रंध्रों वाली त्वचा पर एक्ने की समस्याएं ज़्यादा हो सकती है।
  • ग्लाईकोलिक एसिड या सैलिसिलिक एसिड वाले क्लींजर का प्रयोग है फायदेमंद।
  • धूप में अधिक एक्सपोजर से बचिये, क्योंकि यह त्वचा के लिए नुकसानदेह है।
  • तुलसी व पुदीने की पत्तियों को बराबर मात्रा में पीसकर लगाना है लाभदायका।


पुरूषों की त्वचा महिलाओं की त्वचा से बहुत अलग होती है, क्योंकि यह मोटी होती है और इसमें कनेक्टिव टिश्यूज (कोलेजेन और इलास्टिन) की ज़्यादा तादाद इसे अधिक मज़बूत और लोचदार बनाती है। लेकिन पुरुषों को भी त्वचा संबंधित कई बीमारियां हो सकती है।

ऑयली त्वचा और बड़े रंध्रों वाली त्वचा वाले पुरूषों की त्वचा पर एक्ने का कारण बन सकती हैं। क्योंकि ऐसी त्वचा में त्वचा के रंध्र सीबम और मैल के कारण जाम हो जाते हैं। चूंकि पुरूष शेविंग नियमित करते हैं इससे त्वचा पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है जिससे इरिटेशन, ड्राइनेस और सेंसिविटी उत्पन्न होती है। इनग्रोन हेयर्स और रेजर बम्पिंग की समस्याएं भी इसी कारण आम हो जाती हैं। लिहाजा पुरूषों को भी बेसिक्स से शुरू करते हुए एक त्वचा केयर रूटीन अपनाने की ज़रूरत होती है।

पुरुषों में मुहांसों के कारण


पुरूषों की त्वचा महिलाओं की अपेक्षा 20 परसेंट ज़्यादा तैलीय यानी ऑयली होती है और इसमें बड़े रंध्र होते हैं जिससे इरप्शन्स होने की संभावना भी ज़्यादा होती है। इसके अलावा शरीर में होने वाले हार्मोन्स परिवर्तनों के कारण मुहांसों का होना आम बात  है। कई बार होर्मोन्स परिवर्तन इतना असंतुलित रूप से होता है कि अत्यधिक  मुहांसों के कारण अच्छे भले चेहरे की रंगत खराब हो जाती है।

मुंहासों से बचने के तरीके


  • चेहरे पर हमेशा अच्छे क्लींजर का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। फेश वॉश या लिक्विड क्लींजर केवल महिलाओं के लिये ही नहीं बल्कि पुरूषों के लिये भी होते हैं और इनका इस्तेमाल आपको करना चाहिए।
  • साबुन का इस्तेमाल बार-बार करने से आपकी त्वचा पर ड्राइ इफेक्ट उत्पन्न हो सकते हैं, खासकर यदि आपकी त्वचा ड्राइ प्रकार की है तो ऐसे में ऐसे साबुन का प्रयोग करें जिनमें माइश्चराईजिंग के तत्व हों।
  • ग्लाईकोलिक एसिड या लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड या बेंजाईल पैराक्साईड वाला क्लींजर ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इनमें एन्टिबैक्टीरियल गुणों के अलावा डीप पोर क्लीनिंग के लिये एक्सफॉलिएटिंग गुण भी होते हैं।
  • पुरूषों को अपनी त्वचा माइश्चराईज्ड रखने की कोशिश करनी चाहिये, क्योंकि शेविंग से त्वचा ड्राई हो जाती है। आपकी त्वचा की माइश्चराईजिंग एक त्वचा प्रकार से दूसरे के अनुसार अलग हो सकती है जबकि ऑयली त्वचा प्रकार के लोग माईश्चराईजर के बजाय किसी टोनर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सूखी त्वचा को हैवी ड्यूटी मॉइश्चराईज़र की ज़रूरत होती है। नार्मल त्वचा पर लाइट माईश्चराईजर उपयोग किया जा सकता है। किसी अल्फा-हाईड्रॉक्सी एसिड जैसे कि ग्लाईकोलिक एसिड या सैलिसिलिक एसिड वाला माईश्चराईजर त्वचा टोन और क्वॉलिटी बेहतर करने में मददगार साबित होता है।
  • त्वचा की देखभाल के लिए बहुत जरूरी धूप से बचाव। धूप में ओवर एक्सपोजर न केवल त्वचा को नुकसान पहुंचाता है बल्कि त्वचा कैंसर का खतरा भी उत्पन्न करता है। इसलिए पर्याप्त एसपीएफ सुरक्षा वाली सनस्क्रीन का उपयोग कीजिए। 30 एसपीएफ वाली सनस्क्रीन, जो यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों को ब्लॉक करती हो, इसका उपयोग आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  • धूप में बाहर जाते वक्त अपनी त्वचा को ढंकिये, सनग्लॉसेज का इस्तेमाल करना सन प्रोटेक्शन का एक बेहतर उपाय है।
  • शेविंग के दौरान इनग्रोन हेयर्स के कारण कई कट् या रेजर बम्प लग जाते हैं। यदि शेविंग से आपकी त्वचा पर जलन होती है तो इसके लिये आपका रेजर दोषी हो सकता है। इलेक्ट्रिक और मैनुअल दोनों मेल के रेजरों की अपनी खूबियां होती हैं और इनको प्रयोग करने से पहले इनका मूल्यांकन अवश्य कर लेना चाहिये।

  • मैनुअल रेजर से क्लोजर शेव बनती है क्योंकि ब्लेड त्वचा के नजदीक पहुंचते हैं जो त्वचा इरिटेशन की वजह बन सकते हैं। यदि आपको अक्सर रेजर बम्प होते हैं तो इलेक्ट्रिक रेजर का उपयोग कीजिए। इससे क्लोज शेव नहीं मिलती लेकिन यह त्वचा को समान रूप से इरिटेट कर सकता है क्योंकि यह बालों को खींचता है।
  • कुछ घरेलू नुस्खे भी मुंहांसों से बचा सकते हैं, जामुन की गुठली को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे दूर होते हैं। दही में कुछ बूंदें शहद की मिलाकर उसे चेहरे पर लेप करना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में मुहांसे खतम हो जाते हैं। 
  • तुलसी व पुदीने की पत्तियों को बराबर मात्रा में पीसकर व इसमें थोड़ा-सा  नींबू का रस मिलाकर इसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से मुहांसों से छुटकारा  मिलता है। नीम के पेड़ की छाल को घिसकर मुहांसों पर लगाने से भी मुहांसे घटते हैं।
इन उपायों को आजमाकर पुरुष मुंहासों की समस्या से बच सकते हैं। ये घरेलू उपचार आमतौर पर पूरी तरह सुरक्षित होते हैं और इन्हें आसानी से आजमाया जा सकता है। लेकिन, फिर भी बेहतर रहेगा कि आप इन्हें आजमाने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार के बारे में जान लें, ताकि आपको किसी भी प्रकार की समस्या न हो ।

Thursday, November 13, 2014

Home Remedies Tips - How to get glowing skin in hindi

चमकती हुई त्‍वचा के लिये अपनाइये ये 20 टिप्‍स

साफ और दमकती हुई त्‍वचा अक्‍सर लड़कियों का ख्‍वाब होता है। कई लड़कियों की इतनी साफ त्‍वचा होती है कि अक्‍सर उन्‍हें देखने वाले लोग चौंक जाते हैं। आप सोंचते होगें कि उन्‍हें ये त्‍वचा विरासत में ही मिली होगी और आप खुद के बारे में सोंच कर उदास हो जाती होगीं। पर ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है, किसी भी लड़की कि त्‍वचा चमकदार बन सकती है पर अगर उस पर लगातार ध्‍यान दिया जाए तो। ऐसे कई स्‍किन टिप्‍स हैं जिसे आप अपना कर साफ, बिना दाग-धब्‍बो वाली और चमकीली त्‍वचा पा सकती हैं। टिप्‍स में डाइट ,

मॉइस्‍चराइजिंग और हाइड्रेटिंग आदि शामिल है। कई लड़कियां पार्लर जा कर फेशियल करवा लेती हैं लेकिन अच्‍छा आहार खाने पर ध्‍यान नहीं देती। जिस वजह से उन्‍हें चमकदार त्‍वचा नहीं मिल पाती। इसी तरह से अगर आप बाजरू समान का प्रयोग करती हैं तो वह कुछ दिनों तक अपना असर दिखाएगी पर फिर उसके बाद सब बेकार हो जाती है।

अच्‍छा होगा कि अगर चमकदार त्‍वचा पाना है तो होममेड ब्‍यूटि प्रोडक्‍ट लगाइये। आज हम आपको बताएंगे ऐसे 20 तरीके जिससे आप चमकदार और दाग धब्‍बे रहित त्‍व्‍चा पा सकेंगी। आइये जानते हैं इनके बारे में-

खूब सारा पानी पीजिये :




खूब सारा पानी पीजिये और अंदर से तरोताजा रहिये। इसेस शरीर से गंदगी बाहर निकलती है और बॉडी में नए सेल्‍स बनते हैं।

ताजा जूस पियें :



आपको हर दिन दो गिलास जूस अवश्‍य पीने चाहिये। इससे स्‍किन में पोषण पहुंचेगा और स्‍किन ग्‍लो करेगी।

अच्‍छी नींद लें :



अगर आप ऑफिस के काम की वजह से देर रात तक जगती हैं और सुबह आपकी नींद पूरी नहीं हो पाती तो, इससे आपकी स्‍किन पर असर पड़ सकता है। दिन में कम से कम 8 घंटे जरुर सोना चाहिये।

नींबू :



अपनी डाइट में नींबू का प्रयोग करें। इसमें विटामिन सी पाया जाता है जो कि शरीर से गंदगी को दूर करता है। नींबू का चाहे तो सदाद में छिड़क कर खाएं या फिर गरम पानी में निचोड़ का पी जाएं।

अखरोट :



इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है जो कि स्‍किन के लिये बहुत अच्‍छा माना जाता है। इसके अलावा आप इसके तेल से अपनी त्‍वचा का मसाज भी कर सकती हैं। इससे आप जवान दिखने लगेगीं।

संतरा :



संतरा आपकी त्‍वचा को चमकाने में बहुत मदद कर सकता है। इसका जूस पीजिये चाहे इसके छिलके को सुखा कर इसका पेस्‍ट बना कर लगाइये। यह हर तरह से स्‍किन को चमकदार बनाने में मदद करेगा।

ग्रीन टी :



यह एक हर्बल चाय होती है जो कि सनबर्न को ठीक कर के त्‍वचा से दाग-धब्‍बों को हटा कर उसे कोमल बनाती है।

मछली :



मछली में ओमेगा- 3 पाया जाता है जो कि स्‍किन के लिये बहुत जरुरी विटामिन होता है।

टमाटर :



इसे नियमित खाने से शरीर पर बुढापा धीरे धीरे आता है। यह त्‍वचा को फ्री रैडिक्‍ल से बचाता है और स्‍किन को चमकदार बनाता है।

बनाना मास्‍क :



केले को मैश कर के उसमें शहद और नींबू की कुछ बूंदे मिला लें। इस पेस्‍ट को गर्दन और चेहरे पर लगा कर 15 मिनट तक छोड़ दें और फिर धो लें। ऐसा करीबन हफ्ते में 1 बार करने से त्‍वचा में चमक आ जाएगी।

अंडा :



अंडा खाने से न केवल बॉडी बनती है बल्‍कि यह स्‍किन के लिये भी अच्‍छा होता है। अंडे को अपनी डाइट में शामिल करें और चमकदार त्‍वचा पाएं।

अनार :


अनार में एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता है जो कि त्‍वचा में आई किसी भी प्राकार की चोट और खरोच को जल्‍दी भरने में मददगार होता है। इसको पीने से खून भी बढता है, इसलिये त्‍वचा को लाल दिखाने में यह सहायक होता है।

दाल:



दाल में प्रोटीन होता है, जिसे खाने से त्‍वचा की कोशिकाएं नई बनती हैं और त्‍वचा चमकदार बनता है।

बटर फ्रूट:



त्‍वचा में नमी भरने के लिये आपको बटर फ्रूट का जूस पीना चाहिये। यह त्‍वचा में अंदर से ही चमक लाता है।

आई क्रीम:



आंखों के नीचे डार्क सर्कल को दूर करने के लिये अंडर आई क्रीमल लगाएं। क्रीम अच्‍छी क्‍वालिटी की होनी चाहिये।

स्‍क्रब करें:



त्‍वचा को स्‍क्रबर से स्‍क्रबर करने से नई त्‍वचा आती है और पुराने दाग धब्‍बे हल्‍के पड़ने लग जाते हैं। हफ्ते में 2 बार स्‍क्रब करना चाहिये।

मॉइस्‍चराइजर लगाएं:





अपनी त्‍वचा पर करीबन 10 मिनट तक माइस्‍चराइजर लगा कर मसाज करना चाहिये। चेहरे पर गोलाई में मसाज करें।

फेशियल:



महीने में 1 या 2 बार आपको अपने चेहरे का फ‍ेशियल करवाना चाहिये। अगर इसे रेगुलर किया जाएगा तो आपकी त्‍वचा फ्रेश, हेल्‍दी और यंग दिखेगी।

सनस्‍क्रीन लगाएं:



जब भी आप बाहर कड़ी धूप मे बाहर जाएं तो सनस्‍क्रीन हमेशा साथ में रखें। सूरज की कठोर किरणें त्‍वचा की रंगत को खराब कर देती हैं।

सनग्‍लास लगाएं:



सूरज कि किरणें आंखों के आस पास की त्‍वचा को खराब कर सकती हैं इसलिये इससे बचने के लिये धूप वाला चश्‍मा लगाएं।

पार्लर और सौंदर्य निखारने की नई तकनीक हमारी मुश्किलें आसान तो करती हैं, लेकिन कई बार इनके बुरे प्रभाव भी पड़ते हैं। कास्मेटिक्स से आज पूरा बाज़ार भरा पड़ा है और हर ब्रैंण्ड आपको खूबसूरत बनाने का वादा करता है।

अपने फेवरेट ब्रैण्ड पर तो हम सभी विश्वास करते हैं। लेकिन त्वचा के मामले में अगर नये विकल्पों की बात करें तो शायद ही हममें से कोई इन्हें अपनाने की कोशिश करेगा। महंगे क्रीम, पार्लर या स्पा की बात करें तो शायद खूबसूरती आपको हर तरफ नज़र आयेगी। लेकिन

क्या वाकई में इनके अलावा खूबसूरत दिखने का कोई विकल्प नहीं।डाक्टरों का मानना है कि सौंदर्य के वे उत्पाद जिनसे पूरा बाज़ार भरा पड़ा है उनके कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी आ सकती हैं। अगर हम कुछ ऐसे नुस्खों की बात करें जो आपकी दादी नानी के ज़माने से

सौंदर्य के लिए इस्तेमाल होते आ रहे हैं तो आप उसे ज़रूर आज़मायेंगे। ऐसे भी प्राकृतिक उत्पाद हैं जिन्हें हम भूल चुके हैं और जो सौंदर्य के लिए आवश्यक हैं।

क्लींन्जर हो तो ऐसा:

एक टमाटर के रस को दो बड़े चम्मच दूध के साथ मिला लें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगायें और 10 से 15 मिनट तक छोड़ दें, फिर चेहरा पानी से धो लें। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस क्लीनज़र से ना सिर्फ त्वचा आयल फ्री होती है बल्कि डेड सेल्स भी निकल जाते हैं।

क्रीमी मसाज:

चेहरे पर निखार लाने के लिए क्रीम लगायें और अपवर्ड सर्कुलर मूवमेंट में चेहरे की मसाज करें। इससे आपकी त्वचा में निखार तो आयेगा ही साथ ही त्वचा के डेड सेल्स भी निकल जायेंगे।


अण्डे से निखारें चेहरे की चमक: 

तैलीय त्वचा वालों को चेहरे पर अण्डे का सफेद भाग लगाना चाहिए और शुष्क त्वचा वालों को अण्डे की जर्दी। अण्डे को चेहरे पर लगाने से त्वचा के रोमछिद्र सीमित होते हैं और झुर्रियां भी देर से पड़ती हैं।

यह भी ट्राई करें:

प्राकृतिक तौर पर खूबसूरती पाने के लिए चेहरे पर फलों का रस लगाकर 10 से 15 मिनट तक छोड़ दें। यह एक आसान सा घरेलू नुस्खा है। झुर्रियों से बचने के लिए आप सेब, नीबू या अनानास का रस लगा सकते हैं। क्योंकि फलों में एस्ट्रिसन्जेंट के साथ ब्लीचिंग के गुण भी होते हैं।

ब्लैक हैड्स को कहें गुडबाय:

सभी उम्र के लोगों में यह समस्या बहुत आम है जिसका इलाज बहुत आसान है। ब्लैंकहैड्स निकालने के लिए एक बड़े चम्मच से पीसी हुई काली मिर्च लें और इसमें दही मिला लें। इस मिश्रण को 10 से 15 मिनट तक चेहरे पर लगायें और चेहरा धो लें।

रेशमी बालों के लिए:

ककड़ी, केले, टमाटर और दही का पेस्ट बनायें और बालों को धोने के बाद इस मिश्रण को बालों में लगायें। यह प्राकृतिक कंडीशनर है।

सुंदर दिखने के लिए आप यह तकनीक तो अपना सकते हैं लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है आपका खान-पान और व्यायाम। एक बहुत पुरानी कहावत है कि आप जैसा खाते हैं वैसे ही दिखते हैं। अपनी डायट में फाइबर युक्त फल, हरी सब्जि़यां और एण्टीआक्सिडेंट शामिल करें।

कम से कम 7 से 8 घंटों की नींद ज़रूर लें क्योंकि आराम करना भी अच्छी त्वचा के लिए आवश्यक है।

Causes of bedwetting and solution in hindi

जाने बच्चे का बिस्तर गीला करने का कारण और उसका निवारण

कई लोग अपने बच्चों को लेकर खासा परेशान रहते है| उनकी सबसे बड़ी परेशानी होती उनके बच्चों का बिस्तर पर पेशाब कर देना| बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना एक उम्र तक हर मां- बाप को अच्छा लगता है लेकिन उम्र निकल जाने के बाद भी आगरा बच्चे ऐसा कर रहे हैं तो चिंता का कारण बन जाते हैं| अगर आपका भी बच्चा बिस्तर गीला कर देता है तो आपको ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है|


आपको बता दें कि सोते समय बिस्तर पर पेशाब करने का रोग बच्चो में बहुत ज्यादा पाया जाता है। बच्चों में यह रोग पाचनक्रिया खराब होने के कारण तथा ठंड लग जाने के कारण होता है। इसके अलावा अधिक मीठी चीजें खिलाने से भी यह रोग बच्चों में हो जाता है| 

बिस्तर गीला करने का कारण-

बच्चे दिन भर कुछ न कुछ खाया करते हैं| बार-बार कुछ खाने से बच्चों की पाचन क्रिया खराब हो जाती है। इसके अलावा कुछ बच्चे दिन में ज्यादा समय खेलते-कूदते रहते हैं जिसकी वजह से बच्चे बुरी तरह से थक जाते हैं। ऐसे बच्चों को ज्यादा भूख लगती है और वह खाते ही सो जाते हैं। थकावट की वजह से बच्चे रात को सोते हुए बार-बार पेशाब करते हैं। कई अनुभवियों के अनुसार स्नायु विकृति के कारण बच्चे रात को सोते हुये बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं| स्नायु विकृति में शरीर में बहुत ज्यादा उत्तेजना होती है। ऐसे में बच्चा सोते हुए पेशाब करने पर काबू नहीं कर पाता और पेशाब कर देता है। । पेट में कीड़े होने पर भी बच्चे सोते हुए बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं।

घरेलू उपचार- 




जो बच्चे रात में बिस्तर गीला कर देते हैं उन्हें खजूर व छुहारे अधिक मात्रा में खिलाना चाहिए| इसके अलावा मुनक्का के बीज को निकालकर उसके स्थान पर उसमे काली मिर्च के दाने डाल दें| 2-3 मुनक्के प्रतिदिन सुबह बच्चों को खिलाएं| 

रोजाना रात को सोने से पहले बच्चे को एक चम्मच शहद खिलाएं| एक चम्मच शहद को एक कप पानी में घोलकर 4-5 दिन तक बच्चे को पिलाने से बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।

काला तिल भी इस रोग में लाभदायक होता है| काले तिल को पीसकर चूर्ण बनाकर बच्चों को चटाने से बच्चों के इस प्रकार के रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं। जिन बच्चों को यह रोग हो तो उनके भोजन में चावल, केला, दूध तथा मट्ठा आदि देना बंद कर देना चाहिए।


बच्चे के पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी तथा उसकी रीढ़ पर 8-10 मिनट के लिए गर्म ठंडा सेंक करने से बच्चे का ये रोग ठीक हो जाता है। इसके अलावा बच्चों की धूप में मालिश करने से भी उसका बिस्तर गीला करना बंद हो जाता हैं।

बेड वेटिंग का आयुर्वेदिक उपचार

नींद में बिस्तर करने का मतलब है मूत्र का बेवश त्याग। आम तौर से 3 या 4 वर्ष की उम्र के बाद बच्चे अपने मूत्राशय पर काबू पा लेते हैं, पर कुछ बच्चों में यह प्रक्रिया कमज़ोर रह जाती है और ऐसे बच्चे अनजाने में और अनिच्छा से नींद में बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। यह हरकत कभी कभी15-20 वर्ष की उम्र तक चलती रहती है, जिससे कि बढ़ी हुई उम्र के बच्चे शर्मिंदगी महसूस करते हैं।और यह नींद में बिस्तर गीला करने की बीमारी लड़कियों के बनिबस्त लड़कों में अधिक पाई जाती है। इस रोग के कारण न सिर्फ बच्चे हंसी मज़ाक का विषय बन जाते हैं, बल्कि लौंड्री का खर्च भी बढ़ जाता है। उसके अलावा नींद के पैटर्न अव्यवस्थित हो जाते हैं और नींद की कमी के कारण अनेक समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं।

नींद में बिस्तर गीला करने के कारण


1. मूत्राशय की मांसपेशियों में असुंतलन। 

2. मूत्र की सामान्य मात्रा को पकडे रखने के लिये, अपेक्षा से छोटा मूत्राशय। 

3. शीत पेय या मूत्रवर्धक पेय का सेवन करने से, या मधुमेह या हार्मोन असुंतलन जैसी दीर्घकालीन बीमारी के कारण मूत्राशय में मूत्र का अधिक निर्माण होना। 


दिशा-निर्देश और आयुर्वेदिक उपचार

1. बच्चे जान बूझकर बिस्तर गीला नहीं करते। उनका अपने आप पर नियंत्रण नहीं होता।उनपर गुस्सा करके या डांट कर या अपनी नाराजगी जताकर उन्हें अपने आपको कसूरवार न समझने दें, बल्कि समझदारी से काम लें।

2. रात को सोने से पहले, गुनगुने दूध के साथ पाउडर के रूप में आयुर्वेदिक औषधि शसर्पा का सेवन करने से लाभ मिलता है।.

3. यह पता करने के प्रयास करें कि आपके बच्चे को पर्याप्त नींद मिलती है कि नहीं। सोने की सही समय-सारिणी से बच्चे को उठने में आसानी होगी जब उसे मूत्रत्याग का एहसास होगा। 

4. एक तवे पर धनिये के बीज को भून लें जब तक कि वह भूरे रंग के नहीं हो जाते। इनमे एक चम्मच अनार के फूल, तिल, और बबूल की गोंद मिलाकर एक मिश्रण बना लें और उनका चूरा बना लें। इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सोते समय बच्चे को दें। 

5. बच्चे को आलू, हरे चने, चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी और मसालेदार खान पान, जिससे पेट में गैस बनता है, का सेवन न करायें। सोने से कुछ घंटे पहले तक किसी भी तरह के तरल पदार्थ का सेवन न करायें।

6. सोने से दो तीन घंटे पहले बच्चे को अपना मूत्राशय खाली करने को कहें। फिर उसके सोने के दो या तीन घंटे बाद का अलार्म लगाकर रखें ताकि उसे पेशाब करने के लिए जगाया जा सके। 

7. कभी कभी परिवार के किसी सदस्य या प्रिय मित्र की मृत्यु, माता-पिता का संबंध विच्छेद वगैरह, बच्चों में उच्च तनाव की वजह बनते हैं और नींद में बिस्तर गीला करने के कारण बन सकते हैं। 

8. बच्चे की भावनाओं को समझने के प्रयास करें और उनसे झूजने के लिए सकारात्मक कदम उठायें इससे पहले कि वह भावनाएं तनाव बनकर नींद में मूत्रत्याग के ज़रिये निष्काषित हों। 

9. नियमित आहार में अम्लाकी,अदरक, अजवाइन , जीरा, पुदीना और तुलसी वगैरह का समावेश करें। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जतमंसी वगैरह जैसी तनाव कम करने वाली औषधियों भी काफी असरदार होती हैं।

10. सोने से पहले एक चम्मच शहद के प्रयोग से भी नींद में बिस्तर गीला करने पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 

अन्य आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं, विशातिन्दुका वटी, शिलाजीतवाड़ी वटी, चंद्रप्रभा वटी, वगैरह।